POEM|RAJENDRA DHURANDHAR

मन की आवाज।।

ना तोड़ ना मरोड़ होना चाहिये
ना घटा ना जोड़ होना चाहिये
जिंदगी में कुछ हो या ना होये
बस साफ़ दृष्टिकोड़ होना चाहिए।।।

मिलते नही अब हमदर्द वाले
जो मिले ओ मकड़ी के जाले
जिन्हें हम गंगा जैसे समझते थे
ओ भी दोस्त निकल गये नाले।।।

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